अंकसूची वितरण में लापरवाही पर प्रशासन मौन! अधिवक्ता के आवेदन के 15 दिन बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, छात्रों का भविष्य अधर में

कुनकुरी/जशपुर। राजकुमार की विशेष रिपोर्ट RK GLOBAL NEWS जिले में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। कक्षा 5वीं एवं 8वीं की अंकसूची समय पर वितरित नहीं किए जाने के आरोप में प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी के खिलाफ अपराध दर्ज करने की मांग की गई थी, लेकिन आवेदन दिए जाने के बाद भी अब तक किसी प्रकार की कार्रवाई या जवाब सामने नहीं आया है। इससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुनकुरी निवासी अधिवक्ता विष्णु प्रसाद कुलदीप ने 1 जुलाई 2026 को कलेक्टर जशपुर को लिखित आवेदन सौंपकर प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी नरेंद्र कुमार सिन्हा एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी सुदर्शन पैकरा के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई करने की मांग की थी।
आवेदन में लगाए गए प्रमुख आरोप
1. अंकसूची समय पर नहीं दी गई आवेदन में कहा गया है कि कक्षा 5वीं एवं 8वीं की वार्षिक परीक्षा सम्पन्न होने के बावजूद 30 जून 2026 तक विद्यार्थियों को अंकसूची उपलब्ध नहीं कराई गई।
2. छात्रों का भविष्य प्रभावित आरोप है कि समय पर अंकसूची नहीं मिलने से अनेक विद्यार्थियों का दूसरे विद्यालयों में प्रवेश प्रभावित हुआ। अभिभावकों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ा।
3. स्थानांतरण में आई बाधा आवेदनकर्ता ने अपने पुत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि दूसरे जिले में प्रवेश की प्रक्रिया अंकसूची के अभाव में प्रभावित हुई।
4. विभागीय लापरवाही का आरोप शिकायत में प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी एवं बीईओ पर अपने वैधानिक दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया गया है।
5. अपराध दर्ज करने की मांग अधिवक्ता ने कलेक्टर से दोनों अधिकारियों के विरुद्ध विधिसम्मत अपराध दर्ज कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
अब तक नहीं मिला कोई जवाब
आवेदन प्रस्तुत किए जाने के बाद भी, शिकायतकर्ता के अनुसार आज तक न तो किसी प्रकार का लिखित जवाब प्राप्त हुआ है और न ही कार्रवाई की जानकारी दी गई है। इससे शिकायत के निराकरण को लेकर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।
अभिभावकों में असंतोष
यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य पर पड़ सकता है। कई अभिभावकों का कहना है कि अंकसूची समय पर नहीं मिलने से प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित हुई और बच्चों को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा।
प्रशासन से उठ रहे सवाल
आवेदन मिलने के बाद अब तक क्या जांच शुरू हुई?
शिकायत पर संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण लिया गया या नहीं?
यदि लापरवाही हुई है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
विद्यार्थियों के नुकसान की भरपाई कैसे होगी?
भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए क्या व्यवस्था बनाई जाएगी?
शिकायत की प्रतिलिपि इन अधिकारियों को भी भेजी गई
आवेदन की प्रतिलिपि नेता प्रतिपक्ष, स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव तथा लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक को भी भेजी गई है, ताकि मामले में उच्च स्तर पर संज्ञान लिया जा सके।
प्रशासन से अपेक्षा
शिक्षा जैसे संवेदनशील विषय में किसी भी प्रकार की लापरवाही का प्रभाव सीधे विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ता है। ऐसे मामलों में समयबद्ध जांच और पारदर्शी कार्रवाई आवश्यक मानी जाती है। यदि शिकायत तथ्यात्मक रूप से सही है तो दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए, वहीं यदि आरोप निराधार हैं तो प्रशासन को भी स्पष्ट रूप से अपना पक्ष सार्वजनिक करना चाहिए।

(नोट: यह समाचार उपलब्ध शिकायत-पत्र के आधार पर तैयार किया गया है। संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)












