
RK GLOBAL NEWS PAWAN YADAW BAGICHA / जशपुर। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से गरीब परिवार एवं शासन द्वारा निर्धारित मात्रा में सामग्री उपलब्ध करायी जाती है। राशन मिल के लिए समय-समय पर मूल्य, संचालन और वितरण व्यवस्था के नियम बताए गए हैं। लेकिन ग्राम पंचायत भेड़िया, ब्लॉक मुख्यालय, बगीचा जिला जशपुर में स्थित बिजनेस को लेकर गंभीर स्टॉक सामने आए हैं।

आरोप है कि राशन लेने के लिए उन्हें बार-बार बुलाया जाता है, लेकिन दुकान पर समय नहीं दिया जाता। कई ग्रामीण दूर-दराज़ के इलाक़ों से दो नालों के पार कर राशन ले रहे हैं और स्टोर बंद मीटिंग के बाद घंटों इंतज़ार करने को मजबूर हैं। दुकान विक्रेता फुलमतिया नागेश के खिलाफ व्यवस्था में कई आरोप लगाए हैं। हालाँकि इन दस्तावेजों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद होगी।
1. सुबह 9 बजे वोट का आरोप, दो बजे तक इंतजार
उनका कहना है कि राशन वितरण के लिए सुबह करीब 9 बजे उन्हें फोन किया जाता है। ग्रामीण समय पर योजनाएं और पहुंचें हैं, लेकिन उनका राशन वितरण समय शुरू नहीं हुआ है, कई बार दो बार तक इंतजार किया जा रहा है।
लोगो का कहना है कि गरीब परिवार के लिए एक दिन का समय भी महत्वपूर्ण होता है। हितग्राहियों को राशन लेने का काम ठीक करने के लिए अगर कई घंटे इंतजार करना पड़े तो उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
2. दूर-दराज से आते हैं हितग्राही, दो नाली पार करने की मजबूरी
में कई हितग्राही ऐसे हैं, जिन्हें राशन लेने के लिए काफी दूरी तय करनी पड़ती है।
बारिश के मौसम में नदी और रास्ते की स्थिति खराब होने से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के साथ आने वाले परिवारों को विशेष परेशानी होती है। ऐसे में यदि किसी दुकान की पहुंच के बाद भी राशन वितरण समय पर नहीं होता है तो औसत समस्या और वृद्धि हो जाती है।
3. “रोज़ का नाटक” बता रहे ग्रामीण
लोगो का कहना है कि उन्हें बार-बार एक ही तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। तौर पर इसे “रोज का ड्रामा” के रूप में पेश किया है, जिसमें खाद्य विभाग की मशीन पर वास्तविक स्थिति देखने की मांग की गई है।
ग्रामीण चाहते हैं कि पंचायत अधिकारी सिर्फ कागजों की जांच न करें, बल्कि हितग्राहियों से सीधी बातचीत में पता चला कि वास्तव में राशन वितरण में समय लग गया है और देर तक लोग इंतजार कर रहे हैं।
4. दो माह पुराने चावल की दुकान का आरोप
लोगो ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि दो महीने पहले कथित तौर पर चावल दिया जा रहा था। यदि ऐसा है तो राशन की गुणवत्ता, स्टॉक रिकॉर्ड और वितरण रजिस्टर की जांच जरूरी है।
हालाँकि पुराने स्टॉक का वितरण आपके लिए आपके स्तर पर साबित नहीं होता है, इसलिए इस मामले में संबंधित माह के स्टॉक रजिस्टर, स्टॉक रिकॉर्ड, शेयर, उठाव और वितरण की तारीखों का मिलान करना आवश्यक है।
5. पहले फ़्रैंचाइज़ी ग्राफ़िक और बाद में राशन सिद्धांत की फ़ाइल
लोगो ने दावा किया है कि कई बार हितग्राहियों से पहले राशन लिया जाता है और बाद में राशन दिया जाता है।
यह आरोप विशेष रूप से गंभीर है, क्योंकि पीडीएस वितरण में हितग्राही के नाम पर वास्तविक ऋण वितरण और ऑनलाइन/बायो ऋणदाता का रिकॉर्ड महत्वपूर्ण है। इसलिए विभाग से संबंधित तिथियों के ई-पी मटकी मशीन रिकॉर्ड, बायोमाइलेट ट्रांजेक्शन और वितरण वितरण रजिस्टर का मिलान करना चाहिए।
6. वॉल पर स्टोर की जानकारी दर्ज करें
मॉल पर शॉप लगी दीवार से संबंधित जानकारी भी लिखी हुई दिखाई दे रही है। फोटो में “शासकीय उपभोक्ता ग्राम दुकान”, पंचायत भड़िया और दुकान से संबंधित ऑपरेशन एसोसिएटेड विवरण अंकित हैं। एक अन्य फोटो शॉप 562003031 दिखाई देती है।
वहीं स्टोर ऑपरेशन से संबंधित वॉल राइटिंग फूड स्पेक्टर चंपा कली दिवाकर बताए जा रहे है मुख्य कार्यपालन अधिकारी के रूप में श्री विनोद सिंह का नाम भी अंकित है। बिक्रीकर्ता के रूप में श्रीमती फुलमतिया नागेश का नाम लिखा है।

इनमें से किसी एक को देखने के लिए आपसे जुड़े स्टोर के रिकॉर्ड और वास्तविक संचालन व्यवस्था की जांच की जा रही है।

7. खाद्य विभाग की जांच क्यों जरूरी?
रिवोल्यूशनरी एप्लिकेशन केवल दुकान का समय सीमित नहीं है। इसमें राशन वितरण की प्रक्रिया, हितग्राहियों से लेकर बायो सामान की प्रक्रिया, स्टॉक की स्थिति और कथित रूप से पुराने चावल जाने जैसे बिंदु शामिल हैं।
स्टॉक एक्सचेंज ने मांग की है कि खाद्य विभाग के सक्षम अधिकारी अचानक निरीक्षण करें और नवीनतम आवेदनों की जांच करें-
• दुकान का रियल एस्टेट और बंद होने का समय।
•संबंधित माह में दुकान का छोटा सा भाग दिया गया।
• दुकान विक्रेता ने किस तरह का सामान उठाया।
• स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक स्टॉक का मिलान।
• ई-पी स्काइ मशीन में हितग्राही वितरण की जानकारी दर्ज करें।
• बायोमोनियम/फिंगरप्रिंट ट्रांसजेक्शन की जांच।
• समान और वास्तविक राशन वितरण का समय का मिलान।
• दो माह पुराने चावल के उत्पादों की जांच के लिए लगाए गए आरोप।
• चावल की गुणवत्ता एवं स्टॉक की स्थिति की जांच।
• हितग्राहियों से सीधे बयान लेकर शिकायत की वास्तविकता की पुष्टि।
• दुकान के निर्धारित संचालन समय का पालन हो रहा है या नहीं।
8. स्ट्राइकर ने कॉपीराइटर की जांच की
समीक्षा में कहा गया है कि यदि व्यवस्था सही है तो जांच के बाद स्थिति स्पष्ट नहीं होगी और यदि किसी प्रकार की स्थापना पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
रिकाॅल की मांग है कि जांच के दौरान किसी पूर्व सूचना के बजाय अचानक निरीक्षण किया जाए, ताकि दुकान में वास्तविक स्टॉक और रिकॉर्ड की स्थिति सामने आ सके।

9. शिकायत सही मिली तो हो कार्रवाई
रीटेल ने संबंधित खाद्य अधिकारी से पूरे मामले की जांच की मांग की है। यदि जांच में दस्तावेज़ या किसी अन्य जिम्मेदार व्यक्ति द्वारा उल्लंघन का उल्लंघन, राशन वितरण में रिकॉर्ड या वास्तविक वितरण में अंतर पाया जाता है, तो शासन निर्णय की कार्रवाई की जाएगी।
साथ ही अगर जांच में आद्योपांत के आरोप सही नहीं पाए गए तो विभाग को भी स्पष्ट रूप से वास्तविक आख्यायिका की स्थिति सामने रखनी चाहिए, ताकि किसी भी पक्ष के प्रति गलत कोई धारणा न बने।
10. अब खाद्य विभाग की कार्रवाई पर नजर
ग्राम पंचायत भेड़िया की पीडीएस दुकान से जुड़े आद्योपांत की शिकायत में स्थानीय राशन वितरण व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं। पुनर्मूल्यांकन में कहा गया है कि उन्हें स्थिर राशन मिलने में समय और कीमत लगनी चाहिए, न कि क्वार्टर का इंतजार करना चाहिए।
अब देखें कि खाद्य विभाग और संबंधित अधिकारी इस आवेदन पत्र को किन-किन चयन कक्षों से लेते हैं और क्या जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाते हैं।
यूनिवर्सल ग्लोबल न्यूज़ की अपील: सार्वजनिक वितरण योजना गरीब परिवारों के भोजन अधिकार से जुड़ी महत्वपूर्ण व्यवस्था है। इसलिए किसी भी फाइल को केवल रिकॉर्ड, ई-पी मेटल डेटा, स्टॉक और हितग्राहियों के संकलन के आधार पर सामान्य जांच की जानकारी मिलनी चाहिए। जांच के बाद यदि आरोप प्रमाणित हैं तो कार्रवाई के लिए जिम्मेदार परिणाम सामने आते हैं और यदि आरोप निराधार हैं तो इसकी भी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए।
मुख्य सवाल
पीडीएस दुकान का समय क्या है?
हितग्राहियों को एक ही समय में राशन कैसे मिलता है?
स्टॉक और रियल स्टॉक में रजिस्टर करना क्या उपयोगी है?
कौन सी प्रतिमा और गुणवत्ता पूर्ण माल मिल रही है?
खाद्य विभाग की अचानक जांच से पता चलता है कि किस फाइल की सच्चाई सामने आ रही है?














