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सारूढाप पंचायत में CM हेल्पलाइन 1076 के निराकरण पर उठे गंभीर सवाल, शिकायतकर्ता ने कहा—“कागजों में ही हो गई जांच!”


सारूधाप पंचायत में सीएम 1076 के संबंध में उठे गंभीर सवाल, मेन्स ने कहा- “कागजों में ही हो गई जांच!”

RK GLOBAL NEWS राजकुमार विशेष रिपोर्ट बगीचा जशपुर। ग्राम पंचायत सारूधाप, विकासखंड बगीचा जिला जशपुर से सरकारी निर्माण कार्य और क्षेत्र की जमीन को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां ग्रामीण रूपेश नागेश ग्राम पंचायत में निर्मित महोत्सव की गुणवत्ता को लेकर 29 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री हेल्प लाइन 1076 में शिकायत दर्ज की गई, जिसके बाद अब आवेदन के दावे पर ही सवाल उठाए गए हैं।

रूपेश नागेश का आरोप है कि पुलिया निर्माण में किया गया ढलाईका सैंपल  सामग्री का नमूना लेकर जांच किया जाय और यदि गुणवत्ता में गड़बड़ी पाई जाती है तो कार्य एजेंसी  के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी।

 

लेकिन निर्माण के अनुसार, बिना निर्माण सामग्री के समेकन के लिए और बिना सामग्री की ऐसी जांच के लिए, जिसमें तकनीकी जांच पर विश्वास किया जाता है, संबंधित इंजीनियर/सब-इंजीनियर शुभम भगत की ओर से प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया है। इतना ही नहीं, पोर्टल पोर्टल पर भी आवेदन की बात सामने है।

यही पूरा मामला अब कई सवाल कर रहा है।

1. लॉन्च की गई गुणवत्ता की जांच, अंतिम जांच कैसे हुई?

ग्रामीण  रूपेश नागेश का कहना है कि उन्होंने स्पष्ट रूप से विध्वंस निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाया था, जो पुलिया के  जांच की मांग की थी।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि वास्तव में कोई सामग्री मॉडल नहीं लिया गया है, तो फिर तकनीकी रूप से निर्माण की गुणवत्ता के संबंध में निष्कर्ष क्या आधार पर तैयार किया गया है?

किस मशीन पर मॉडल की लंबाई, चौड़ाई, पेंसिल, सामग्री, निर्माण की स्थिति और मॉडल की तकनीक का परीक्षण किया गया?

तो उनका पंचनामा, निरीक्षण प्रतिवेदन, माप पुस्तिका (मापन पुस्तिका), तकनीकी परीक्षण या अन्य संबंधित दस्तावेज कहां हैं?

2. मुख्यमंत्री हेल्प लाइन 1076 का मकसद सिर्फ “निराकरण” दिखाना नहीं

छत्तीसगढ़ शासन की आधिकारिक जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री सिकायत 1076 नागरिकों के मित्रता के संबंध में, जनसंख्या उत्तरदायित्व की स्थापना के लिए व्यवस्था बनाई गई है। शिकायत दर्ज होने के बाद उसकी स्थिति, संबंधित विभाग और अधिकारी और उपलब्ध कार्रवाई की जानकारी, कार्रवाई की व्यवस्था भी बताई गई है।

ऐसे में यदि किसी निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर शिकायत दर्ज की जाती है तो केवल पेपर पर उत्तर प्रस्ताव का मामला बंद कर देना चाहिए।

 

यदि पुलिया  की गुणवत्ता वास्तव में ठीक है तो सरकार के पास उसे तकनीकी रूप से प्रमाणित करने के लिए प्रामाणिकता का कागजात प्रस्तुत करना  चाहिए।

 

3. सचिव गणेश यादव की भूमिका पर भी सवाल

ग्राम पंचायत के गणेश सचिव यादव की भूमिका को लेकर भी ग्रामीण प्रश्न उठा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 की धारा 49ई में ग्राम पंचायत के निर्माण कार्य की मंजूरी और पंचायत क्षेत्र के निर्माण कार्य के विकास और पर्यवेक्षण का उल्लेख है।

वहीं पंचायत क्षेत्र में पंचायत निर्माण एवं विकास समिति के कार्य योजना, प्रबंधन, व्यवस्थापन एवं पर्यवेक्षण का भी उल्लेख किया गया है।

प्रश्न यह भी है कि पंचायत स्तर पर निर्माण कार्य से संबंधित क्या प्रक्रिया शुरू हो गई है?

किस एजेंसी/माध्यम से काम लिया गया?

किस योजना से राशी चेन्ज हुई?

कितनी राशियाँ हुई?

भुगतान हुआ?

अंतिम माप लिया गया?

किस अधिकारी ने तकनीकी उद्यम दिया?

गुणवत्ता की जिम्मेदारी किसकी थी?

इन सवालों के जवाब सार्वजनिक होना चाहिए।

4. इंजीनियर शुभम भगत के प्रतिवेदन पर सबसे बड़ा सवाल

मेन्स के संबंध में सब-इंजीनियर शुभम भगत द्वारा जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया है, जबकि मेन्स का आरोप है कि निर्माण सामग्री का विवरण ही नहीं लिया गया है।

यदि यह तथ्य सही है तो मामले की जांच की प्रक्रिया की गुणवत्ता का पता नहीं लगाया जा सकता है।

एक वैज्ञानिक तकनीकी जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि अधिकारी ने तकनीकी दस्तावेज को किस आधार पर देखा, क्या कहा, किस-किस से तकनीकी दस्तावेज को देखा और किस आधार पर दस्तावेज को सही या गलत माना।

केवल “कार्यवस्तुपूर्ण है” लेखन से तकनीकी जांच की पुष्टि नहीं होती है

बल्कि प्रशासन को स्वयं आगे बढ़ने का तकनीकी परीक्षण करना चाहिए ताकि मीन के मन में उठ रहे उपकरणों पर विराम लग सके।

6. अधिकारियों के लिए यह मामला चेतावनी क्यों?

सरकारी निर्माण कार्य के पैसे से होते हैं। इसलिए निर्माण की गुणवत्ता और उसके भुगतान की प्रक्रिया में प्लॉट अत्यंत आवश्यक है।

छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम के अंतर्गत ग्राम पंचायत को विकास की मंजूरी और निर्माण एवं विकास की निगरानी से संबंधित जिम्मेदारियां दी गई हैं।

यदि किसी निर्माण कार्य के लिए टेक्निकल एसोसिएटेड शिकायत दर्ज की गई है तो संबंधित अधिकारी का दायित्व केवल समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि उस याचिका की वास्तविक वास्तविकता की जांच कर स्पष्ट और पुष्टिकरण निष्कर्ष निकाला गया है।

पुनः प्राप्ति की मांग—स्वतंत्र जांच हो

अब समीक्षा करें और ग्रामीण  की मांग है कि सारूधाप पंचायत में निर्मित खोज की जांच स्थानीय स्तर से अलग किसी स्वतंत्र तकनीकी टीम से की जाए।

जांच में निम्नलिखित आँकड़ों को शामिल किया जाना चाहिए —

1. फ्लोरिडा की टेक्नोलॉजी इलेक्ट्रॉनिक्स और फ्लोरिडा प्राक्कलन की जांच।

2.राशि और वास्तविक भुगतान की जांच।

3. मापपुस्तक की जांच।

4. निर्माण में सहयोगी सामग्री की गुणवत्ता की जांच।

5. छड़, गिट्टी एवं अन्य सामग्री के अनुपात की जांच।

6.पुलिया वास्तविक निर्माण की माप।

7. भुगतान से पहले और बाद में समीक्षा की जांच।

8. मुख्यमंत्री हेल्प लाइन में प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन की जांच।

9. ग्रामीणों के सामने आधार की प्रक्रिया की जांच की गई।

10. यदि सचिव गणेश यादव/सरपंच सारू ढाप गुणवक्ता में कमी पाई जाती है तो कार्यवाही तत्काल होनी चाहिए 

प्रश्न अभी बाकी हैं…

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आवेदन पत्र की जांच किस प्रक्रिया से हुई?

यदि निर्माण सही है तो तकनीकी प्रमाण पत्र सामने रखा जाए।

और यदि आवेदन पत्र की जांच के बिना एटीमी तकनीकी परीक्षण किया गया है, तो यह भी जांच का विषय होना चाहिए।

“शिकायत बंद करना आसान है, लेकिन आवेदन पत्र का समाधान करना ही असली सुशासन है।”

अब देखें कि प्रशासन पेपरली विश्वसनीय या स्वतंत्र निर्माता तकनीकी जांच की सच्चाई क्या है।

जनपद पंचायत CEO बगीचा भी तो सम्मलित नहीं

Rajkumar