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बार-बार समय मांगने से न्यायिक प्रक्रिया में देरी? अनुप कुमार गुप्ता के मामले में लगातार बढ़ी सुनवाई की तारीखें


अपर कलेक्टर न्यायालय के रिकॉर्ड में कई बार तर्क के लिए समय मांगे जाने का उल्लेख, अब 21 अगस्त को सुनवाई — क्या अनावश्यक देरी पर प्रशासन सख्ती करेगा?

RK GLOBAL NEWS राजकुमार विशेष रिपोर्ट फरसाबहार उपलब्ध अपर कलेक्टर जशपुर न्यायालय के कार्रवाई विवरण के आधार पर यह मामला पुनरीक्षण प्रकरण क्रमांक 202602031800011, विषय अ-12 (सीमांकन) से संबंधित है। पक्षकार के रूप में अनुप कुमार गुप्ता का नाम दर्ज है।

1. 16 फरवरी 2026 से शुरू हुई कार्रवाई

रिकॉर्ड के अनुसार अनुप कुमार गुप्ता द्वारा तहसीलदार फरसाबहार के 12 जनवरी 2026 के अंतरिम आदेश के विरुद्ध धारा 50 छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 के तहत पुनरीक्षण प्रस्तुत किया गया।

2. 6 मार्च को भी मामला आगे बढ़ा

6 मार्च 2026 को पुनरीक्षणकर्ता की ओर से अधिवक्ता उपस्थित हुए। रिकॉर्ड में अधीनस्थ न्यायालय का मूल प्रकरण प्राप्त नहीं होने का उल्लेख है और आगे अभिलेख प्राप्त करने के लिए तारीख दी गई।

3. 27 मार्च को भी मूल रिकॉर्ड का इंतजार

27 मार्च की कार्यवाही में भी अधीनस्थ न्यायालय का मूल प्रकरण प्राप्त नहीं होने का उल्लेख दर्ज है।

4. 17 अप्रैल की तारीख को प्रशासनिक कारण से बढ़ी सुनवाई

यह महत्वपूर्ण है कि 17 अप्रैल की तारीख बढ़ने का कारण रिकॉर्ड में मुख्यमंत्री के जशपुर प्रवास के दौरान कानून एवं सुरक्षा व्यवस्था में पीठासीन अधिकारी की व्यस्तता बताया गया है।

5. 8 मई को अधीनस्थ न्यायालय का प्रकरण प्राप्त हुआ

8 मई 2026 को रिकॉर्ड के अनुसार अधीनस्थ न्यायालय का प्रकरण प्राप्त होकर मुख्य प्रकरण में संलग्न किया गया और मामला तर्क के लिए रखा गया।

6. 5 जून को तर्क प्रस्तुत नहीं हुआ

5 जून की कार्यवाही में दोनों पक्ष उपस्थित रहे, लेकिन रिकॉर्ड के अनुसार तर्क प्रस्तुत नहीं हुआ। अधिवक्ताओं द्वारा तर्क के लिए समय मांगा गया और समय दिया गया।

7. 9 जुलाई को मामला फिर तर्क के लिए लंबित रहा

9 जुलाई को प्रकरण तर्क हेतु नियत होने के बावजूद मामला आगे की तारीख 17 जुलाई 2026 के लिए रखा गया।

8. 17 जुलाई को मिला ‘अंतिम अवसर’

17 जुलाई को दोनों पक्षों के अधिवक्ता उपस्थित थे, लेकिन रिकॉर्ड में फिर तर्क प्रस्तुत नहीं होने तथा अधिवक्ताओं द्वारा अवसर मांगे जाने का उल्लेख है। इसके बाद तर्क हेतु अंतिम अवसर दिया गया और अगली तारीख 31 जुलाई निर्धारित हुई।

9. 31 जुलाई को फिर समय मांगा गया

31 जुलाई की कार्यवाही में भी अनुप कुमार गुप्ता की ओर से अधिवक्ता श्री के. अहमद उपस्थित बताए गए हैं। रिकॉर्ड के अनुसार पुनरीक्षणकर्ता के अधिवक्ता द्वारा तर्क के लिए समय मांगा गया। विचार के बाद न्यायालय ने “सर्वथा अंतिम अवसर” दिया। अब सुनवाई की तारीख 21 अगस्त 2026 निर्धारित है।

पेशी का तारीख…………….

 

बनता हुआ भवन

13/12/2026 का फोटो

प्रशासन के सामने बड़ा सवाल

न्यायालयीन रिकॉर्ड में बार-बार “तर्क हेतु समय चाहा गया”, “अंतिम अवसर” और अंततः “सर्वथा अंतिम अवसर” जैसे उल्लेख सामने आ रहे हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर किसी मामले में तर्क प्रस्तुत करने में इतनी बार समय क्यों लिया जा रहा है?

क्या न्यायालय की प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब हो रहा है?

क्या बार-बार तारीख बढ़ने से न्याय मांगने वाले पक्षकारों का समय और प्रशासनिक संसाधन प्रभावित नहीं हो रहे?

क्या निर्धारित अवसरों का समय पर उपयोग नहीं किया जाना न्यायिक प्रक्रिया की गति पर असर नहीं डालता?

“नियम सबके लिए समान होना चाहिए”

यह कहना उचित होगा कि उपलब्ध दस्तावेज अनुप कुमार गुप्ता द्वारा किसी नियम का उल्लंघन सिद्ध नहीं करता। रिकॉर्ड केवल यह दर्शाता है कि उनकी ओर से अधिवक्ता ने कुछ अवसरों पर तर्क के लिए समय मांगा और न्यायालय ने समय प्रदान किया। इसलिए आरोप लगाने के बजाय प्रशासन से यह सवाल उठाना अधिक उचित है कि बार-बार स्थगन/समय मांगने की स्थिति में न्यायालय की प्रक्रिया को समयबद्ध कैसे रखा जाएगा।

अब 21 अगस्त  पेशी पर नजर

अब इस प्रकरण की अगली सुनवाई 21 अगस्त 2026 को तर्क हेतु निर्धारित है। न्यायालय द्वारा 17 जुलाई को अंतिम अवसर और 31 जुलाई को “सर्वथा अंतिम अवसर” दिए जाने के बाद यह तारीख मामले के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

RK GLOBAL NEWS की नजर:

तारीख पर तारीख नहीं, अब हो मामले में ठोस सुनवाई!”

नोट: यह समाचार उपलब्ध न्यायालयीन कार्रवाई विवरण पर आधारित है। इसमें दर्ज कार्यवाही को तथ्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है; किसी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर न्यायालय का समय बर्बाद करने का निष्कर्ष दस्तावेज से स्वतः सिद्ध नहीं होता।

Rajkumar