
RK GLOBAL NEWS राजकुमार विशेष रिपोर्ट जशपुर। शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में जशपुर जिले के फरसाबहार विकासखंड से एक सराहनीय उदाहरण सामने आया है। विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) फरसाबहार द्वारा विद्यालयों की नियमित निगरानी, जांच और तथ्यात्मक प्रतिवेदन के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) जशपुर ने शासकीय प्राथमिक शाला सिकिरमा की प्रधान पाठक श्रीमती सुमन्ति तिर्की विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया है।
14 जुलाई को 25 मिनट लेट पर लगाया था खबर

यह कार्रवाई यह दर्शाती है कि यदि अधिकारी अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करें तो सरकारी विद्यालयों में अनुशासन और गुणवत्ता दोनों सुनिश्चित की जा सकती हैं।
प्रमुख बिंदु
1-17 जुलाई 2026 को विकासखंड शिक्षा अधिकारी फरसाबहार ने जिला शिक्षा अधिकारी को विस्तृत प्रतिवेदन भेजा।
2-प्रतिवेदन के आधार पर विद्यालय की गतिविधियों की गंभीरता से जांच की गई।
जांच में पाया गया कि संबंधित प्रधान पाठक विद्यालय समय पर 3-उपस्थित नहीं थीं।
4,- बताया गया कि विद्यालय खुलने के कई दिनों बाद भी वे विद्यालय नहीं पहुंचीं।
5 – विद्यालय में छात्रों के पठन-पाठन एवं प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
6- जिला शिक्षा अधिकारी ने संबंधित अधिकारी से स्पष्टीकरण भी मांगा।
प्राप्त जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया।
7- जांच प्रतिवेदन और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर कार्रवाई की गई।
छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियमों के उल्लंघन का उल्लेख करते हुए निलंबन आदेश जारी किया गया।

निलंबन अवधि में नियमानुसार मुख्यालय निर्धारित किया गया।
सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता सुधारने के लिए ऐसी सक्रिय कार्यशैली अत्यंत आवश्यक है। यदि प्रत्येक विकासखंड में इसी प्रकार नियमित निरीक्षण और निष्पक्ष प्रतिवेदन तैयार किए जाएं तो शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार संभव है।
जिला शिक्षा अधिकारी का सख्त संदेश
जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी आदेश यह स्पष्ट करता है कि विद्यालयों में लापरवाही, अनियमित उपस्थिति और शैक्षणिक कार्यों की उपेक्षा किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। शिक्षा विभाग अब केवल निर्देश जारी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए कार्रवाई भी कर रहा है।
विद्यार्थियों के हित सर्वोपरि
विद्यालय का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। जब शिक्षक अथवा प्रधान पाठक नियमित रूप से विद्यालय में उपस्थित नहीं रहते, तब सबसे अधिक नुकसान विद्यार्थियों का होता है। ऐसे मामलों में समय पर कार्रवाई विद्यार्थियों के भविष्य की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

- (नोट: यह समाचार आपके द्वारा साझा किए गए आदेश की सामग्री पर आधारित है। संबंधित कर्मचारी का पक्ष या आगे की अपील/निर्णय उपलब्ध होने पर उसे भी प्रकाशित करना पत्रकारिता की निष्प7pक्षता के अनुरूप रहेगा।)













