
जशपुर। राजकुमार की रिपोर्ट
सुशासन तिहार के प्रथम दिन प्रशासन और आम जनता के बीच मजबूत विश्वास का एक सकारात्मक और प्रेरणादायक दृश्य सामने आया। पत्थलगांव विकासखंड के सुदूर वनांचल ग्राम चंदागढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का अचानक एक साधारण किराना दुकान पर पहुंचना, शासन की संवेदनशीलता और जमीनी जुड़ाव को दर्शाता है।

‘लखपति दीदी’ सुमिला कोरवा की छोटी-सी दुकान उस समय चर्चा का केंद्र बन गई, जब मुख्यमंत्री स्वयं वहां पहुंचे। सुमिला ने पारंपरिक तरीके से लौंग-इलायची से उनका स्वागत किया, जिससे आत्मीयता और सम्मान का भाव स्पष्ट झलकता है। मुख्यमंत्री ने न केवल सुमिला से संवाद किया, बल्कि उनके संघर्ष और आत्मनिर्भरता की कहानी को भी ध्यानपूर्वक सुना।
प्रशासनिक योजनाओं का जमीनी असर इस उदाहरण में साफ दिखाई दिया। सुमिला कोरवा ने मुद्रा योजना के तहत ऋण लेकर अपनी दुकान शुरू की थी, जो आज गांव में रोजगार और सुविधा का प्रमुख केंद्र बन चुकी है। दुकान में रोजमर्रा के सामान के साथ-साथ फोटो कॉपी और ठंडे पानी जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं, जिससे ग्रामीणों को लाभ मिल रहा है।
मुख्यमंत्री ने दुकान से सामान खरीदा और खुद भुगतान कर यह संदेश दिया कि हर मेहनत की उचित कीमत होती है। उनका यह व्यवहार शासन की पारदर्शिता और ईमानदारी को दर्शाता है। उन्होंने सुमिला की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाते हैं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित करते हैं।
यह पूरा घटनाक्रम प्रशासन की सकारात्मक कार्यशैली को उजागर करता है, जहां योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जमीनी स्तर पर लोगों के जीवन में बदलाव ला रही हैं। सुशासन तिहार के माध्यम से शासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित कर समस्याओं के त्वरित समाधान की दिशा में भी ठोस पहल की जा रही है।
निष्कर्ष:
सुशासन तिहार केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि जनकल्याण की भावना को धरातल पर उतारने का प्रभावी माध्यम बनता नजर आ रहा है, जहां प्रशासन और जनता के बीच विश्वास, पारदर्शिता और सहभागिता का नया अध्याय लिखा जा रहा है।



