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तीन-तीन शासन आदेशों के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई! जशपुर में सहायक आयुक्त कार्यालय में कार्यरत व्याख्याता पर उठे सवाल, जिला शिक्षा अधिकारी से जवाब तलब


शासन के तीन-तीन आदेश बेअसर! जशपुर में आज भी सहायक आयुक्त कार्यालय में जमे व्याख्याता, जिला शिक्षा अधिकारी की भूमिका पर उठे सवाल

RK GLOBAL NEWS राजकुमार की विशेष रिपोर्ट जशपुर। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा शिक्षकों के संलग्नीकरण (अटैचमेंट) को समाप्त करने के लिए बार-बार आदेश जारी किए जाने के बावजूद जशपुर जिले में एक व्याख्याता का सहायक आयुक्त, आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के कार्यालय में कार्यरत रहना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अब इस पूरे मामले में जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) जशपुर की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है।

आदेश

1. पहला आदेश (28 फरवरी 2024)

स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट आदेश जारी किया कि गैर-शैक्षणिक कार्यों में संलग्न सभी शिक्षक संवर्ग के कर्मचारियों का संलग्नीकरण तत्काल समाप्त किया जाए।

सभी शिक्षकों को उनकी मूल पदस्थापना वाले विद्यालय में भेजने के निर्देश दिए गए।

2. दूसरा आदेश (19 मई 2026)

लोक शिक्षण संचालनालय ने विधानसभा प्रश्न के संदर्भ में जानकारी मांगी।

पूछा गया कि संलग्नीकरण समाप्त होने के बाद भी कौन-कौन से शिक्षक जिला, विकासखंड एवं अन्य कार्यालयों में कार्यरत हैं।

3. तीसरा आदेश (25 जून 2026)

संचालनालय ने पुनः सभी संलग्न शिक्षकों को तत्काल कार्यमुक्त कर मूल पदस्थापना पर भेजने के निर्देश दिए।

पालन प्रतिवेदन भी संचालनालय को भेजने को कहा गया।

4. फिर भी जशपुर में नहीं हुआ पालन

तीन-तीन आदेशों के बावजूद व्याख्याता मनोज सोनी आज भी सहायक आयुक्त कार्यालय में कार्यरत बताए जा रहे हैं।

उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार 25 जून 2026 के पत्र में उन्होंने “एकलव्य समन्वयक, कार्य. सहायक आयुक्त” के रूप में हस्ताक्षर किए।

5. संयुक्त संचालक ने भी मांगी रिपोर्ट

09 जुलाई 2026 को संयुक्त संचालक, शिक्षा, सरगुजा संभाग ने जिला शिक्षा अधिकारी जशपुर से सात दिवस के भीतर विस्तृत प्रतिवेदन मांगा।

संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए।

6. सबसे बड़ा सवाल जिला शिक्षा अधिकारी पर

जब शासन और संचालनालय के लगातार आदेश मौजूद हैं तो उनका पालन क्यों नहीं हुआ?

क्या जिला शिक्षा अधिकारी ने शासन के निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया?

संयुक्त संचालक द्वारा रिपोर्ट तलब किए जाने के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

7. प्रशासनिक जवाबदेही पर प्रश्न

यदि व्याख्याता को कार्यालय में रखने का कोई सक्षम आदेश है तो उसे सार्वजनिक किया जाए।

यदि कोई वैध आदेश नहीं है तो शासन के निर्देशों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई हो।

उठ रहे प्रमुख सवाल

तीन-तीन शासन आदेशों के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?

जिला शिक्षा अधिकारी ने आदेशों का पालन क्यों सुनिश्चित नहीं कराया?

क्या शासन के निर्देश केवल कागजों तक सीमित हैं?

प्रतिवेदन मांगने के बाद भी कार्रवाई में देरी किसके संरक्षण में हो रही है?

जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?

मांग

व्याख्याता मनोज सोनी को तत्काल सहायक आयुक्त कार्यालय से कार्यमुक्त कर मूल पदस्थापना संस्था में भेजा जाए।

पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

यदि कोई सक्षम आदेश मौजूद है तो उसे सार्वजनिक किया जाए।

(नोट: यह समाचार उपलब्ध दस्तावेजों और संबंधित आदेशों के आधार पर तैयार किया गया है। संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाना चाहिए।)

Rajkumar