
95.89 करोड़ की एम-कैड योजना से 13 गांवों के 4933 हेक्टेयर क्षेत्र को मिलेगा सिंचाई लाभ, 6 माह में पूरा होगा निर्माण कार्य
जशपुरनगर, 1 मई 2026। राजकुमार की रिपोर्ट
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने अपने गृह ग्राम बगिया में समृद्धि कमांड क्षेत्र विकास एवं जल प्रबंधन आधुनिकीकरण (एम-कैड) योजना अंतर्गत दाबित उद्वहन सिंचाई प्रणाली के निर्माण कार्य का शुभारंभ करते हुए कहा कि जशपुर जिला जल्द ही आधुनिक दाबित सिंचाई प्रणाली का राष्ट्रीय मॉडल जिला बनेगा। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल सिंचाई परियोजना नहीं, बल्कि “हर बूंद से अधिक उत्पादन” के संकल्प को साकार करने वाली ऐतिहासिक पहल है।
कार्यक्रम में केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास राज्य मंत्री Tokhan Sahu, कृषि मंत्री Ramvichar Netam सहित कई जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पारंपरिक नहर प्रणाली के स्थान पर आधुनिक प्रेसराइज्ड पाइप इरिगेशन नेटवर्क विकसित किया जाएगा। पाइपलाइन जमीन के भीतर बिछाई जाएगी, जिससे भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और जल संरक्षण भी बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि अब किसानों को बारिश पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और उन्हें समय पर पर्याप्त सिंचाई जल उपलब्ध होगा।
यह महत्वाकांक्षी परियोजना कांसाबेल विकासखंड के बगिया क्लस्टर में मैनी नदी पर बगिया बैराज सह दाबित उद्वहन सिंचाई योजना के माध्यम से लागू की जा रही है। भारत सरकार द्वारा इस योजना के लिए 95.89 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जबकि कुल परियोजना लागत लगभग 119 करोड़ रुपये है। देशभर के 23 राज्यों की 34 स्वीकृत परियोजनाओं में छत्तीसगढ़ का यह एकमात्र चयनित क्लस्टर है।
इस योजना के तहत बगिया, उसकुटी, रजोती, सुजीबहार, चोंगरीबहार, बांसबहार, डोकड़ा, सिकरिया, पतराटोली, गहिराडोहर, बीहाबल, नरियरडांड और ढुढुडांड सहित 13 गांवों के लगभग 4933 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलेगी।
केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने कहा कि यह परियोजना क्षेत्र के किसानों के जीवन में बड़ा बदलाव लाएगी और गांवों के सर्वांगीण विकास का आधार बनेगी। वहीं कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने इसे किसानों के लिए “वरदान” बताते हुए कहा कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
समृद्धि योजना के स्टेट नोडल ऑफिसर Alok Agrawal ने बताया कि यह परियोजना आगामी 6 माह में पूर्ण कर ली जाएगी। योजना में सौर ऊर्जा आधारित विद्युत आपूर्ति, SCADA सिस्टम और IoT जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा, जिससे जल वितरण वैज्ञानिक और नियंत्रित तरीके से संभव होगा।
परियोजना के संचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी प्रारंभिक 5 वर्षों तक ठेकेदार के पास रहेगी, इसके बाद इसे जल उपभोक्ता समिति को सौंपा जाएगा। समिति में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी।
यह परियोजना जशपुर के किसानों को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में सक्षम बनाएगी तथा कृषि उत्पादन, लाभप्रदता और किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करेगी।




