
15 साल से 5 किलोमीटर कीचड़ में सफर! टांगोटोली के ग्रामीण बोले—सड़क नहीं, मजबूरी का रास्ता
RK GLOBAL NEWS राजकुमार विशेष रिपोर्ट फरसाबहार/कंदई बहार। ग्राम पंचायत कंदई बहार के अंतर्गत आने वाले छिरोटोली टांगोटोली के ग्रामीण पिछले करीब 15 वर्षों से सड़क की बदहाली का दंश झेल रहे हैं। धवड़ासांड़ रोड से टांगोटोली तक लगभग 5 किलोमीटर का रास्ता बरसात के दिनों में कीचड़ में तब्दील हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से सड़क निर्माण और स्थायी सुधार की मांग के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।
1. पांच किलोमीटर का सफर बना मुसीबत
धवरा सांड़ रोड से टांगोटोली तक पहुंचने वाला लगभग पांच किलोमीटर का रास्ता ग्रामीणों के लिए रोजमर्रा की सबसे बड़ी परेशानी बन गया है। बारिश होते ही सड़क पर जगह-जगह कीचड़ और पानी भर जाता है। पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है और दोपहिया वाहन चालकों को दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
2. बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा असर
टांगोटोली में प्राथमिक शाला संचालित है। इसके अलावा यहां आंगनबाड़ी केंद्र भी हैं। ग्रामीणों के अनुसार खराब रास्ते के कारण छोटे बच्चों को स्कूल और आंगनबाड़ी तक आने-जाने में काफी परेशानी होती है। बरसात के दिनों में अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है।

3. ग्रामीणों का आरोप—गांव के साथ सौतेला व्यवहार
ग्रामीणों का आरोप है कि टांगोटोली क्षेत्र को लंबे समय से विकास के मामले में सौतेला व्यवहार झेलना पड़ रहा है। उनका कहना है कि आसपास के क्षेत्रों में सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाओं का विकास हो रहा है, लेकिन टांगोटोली की सड़क की समस्या वर्षों से बनी हुई है।
4. पंचायत प्रतिनिधियों के सामने भी समस्या
क्षेत्र से जुड़े पंचायत प्रतिनिधियों में पंच बालमती भगत, पंच रोहित केरकेट्टा और पंच अलका केरकेट्टा के नाम ग्रामीणों ने बताए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर सड़क की समस्या को लेकर आवाज उठती रही है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।
5. पंचायत की जिम्मेदारी पर उठ रहे सवाल
ग्राम पंचायत कंडईबहार की सरपंच अनीता टोप्पो तथा सचिव संतोष बताए गए हैं। ग्रामीणों का सवाल है कि जब गांव के लोगों को वर्षों से सड़क की परेशानी झेलनी पड़ रही है, तो पंचायत और संबंधित विभाग द्वारा अब तक स्थायी सड़क निर्माण के लिए ठोस पहल क्यों नहीं की गई?
6. बरसात में हालात और बदतर
ग्रामीणों के मुताबिक गर्मी के दिनों में किसी तरह आवागमन हो जाता है, लेकिन बारिश शुरू होते ही पांच किलोमीटर का रास्ता कीचड़ से भर जाता है। कई जगह सड़क इतनी खराब हो जाती है कि वाहन निकालना जोखिम भरा हो जाता है।
7. बीमार व्यक्ति को ले जाना भी चुनौती
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में किसी व्यक्ति की तबीयत खराब होने पर उसे मुख्य सड़क तक पहुंचाना भी मुश्किल हो जाता है। खराब रास्ते के कारण एंबुलेंस या अन्य चारपहिया वाहन के गांव तक पहुंचने में परेशानी हो सकती है। ऐसे में आपात स्थिति में ग्रामीणों की मुश्किल और बढ़ जाती है।
8. स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा का सवाल
सबसे गंभीर सवाल स्कूली बच्चों को लेकर है। रोजाना बच्चे इसी रास्ते से होकर स्कूल पहुंचते हैं। कीचड़ में फिसलने, कपड़े खराब होने और वाहन दुर्घटना जैसी आशंकाएं बनी रहती हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि बच्चों की सुविधा और सुरक्षा को देखते हुए सड़क को प्राथमिकता के आधार पर बनाया जाए।
9. नदी से बालू निकासी का भी ग्रामीणों ने उठाया मुद्दा
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि क्षेत्र की नदी से बालू निकासी की जाती है। उनका कहना है कि इसी मार्ग से बालू का परिवहन भी होता है, जिससे सड़क पर भारी वाहनों की आवाजाही होती है और पहले से खराब रास्ते पर दबाव बढ़ता है।
10. बालू परिवहन से पंचायत को राजस्व मिलने का दावा
ग्रामीणों का दावा है कि बालू परिवहन के दौरान पंचायत स्तर पर प्रति ट्रिप 100 रुपये लिए जाते हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कुछ मामलों में यह राशि बिना कागज या रसीद के ली जाती है। हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
11. रसीद और हिसाब-किताब सार्वजनिक करने की मांग
यदि पंचायत द्वारा बालू परिवहन के नाम पर कोई राशि ली जा रही है, तो ग्रामीणों की मांग है कि इसकी रसीद, नियम, दर, अनुमति और पंचायत के लेखा-जोखा को सार्वजनिक किया जाए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि राशि किस नियम के तहत ली जा रही है और पंचायत खाते में उसका समुचित हिसाब दर्ज है या नहीं।
12. एक तरफ राजस्व, दूसरी तरफ सड़क बदहाल
ग्रामीणों का सवाल बेहद सीधा है—यदि क्षेत्र से संसाधनों का उपयोग हो रहा है और पंचायत को किसी प्रकार का राजस्व प्राप्त हो रहा है, तो फिर उसी क्षेत्र की सड़क वर्षों से बदहाल क्यों है? ग्रामीण चाहते हैं कि सड़क की समस्या को केवल बरसात के समय की समस्या न मानकर स्थायी विकास कार्य के रूप में देखा जाए।
13. 15 साल का इंतजार अब खत्म करने की मांग
ग्रामीणों के अनुसार लगभग 15 वर्षों से सड़क की समस्या बनी हुई है। इतने लंबे समय के बाद भी यदि करीब पांच किलोमीटर रास्ते का स्थायी समाधान नहीं हुआ है, तो यह संबंधित विभागों और पंचायत व्यवस्था के लिए गंभीर सवाल है।
14. ग्रामीणों ने की स्थायी सड़क निर्माण की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि धवड़ासांड़ रोड से टांगोटोली तक लगभग पांच किलोमीटर सड़क का स्थल निरीक्षण कराकर गुणवत्तापूर्ण एवं स्थायी सड़क निर्माण कराया जाए। साथ ही बरसात के दौरान तत्काल आवागमन योग्य व्यवस्था करने की मांग भी की गई है।
15. प्रशासन से जांच की भी मांग
बालू परिवहन और पंचायत स्तर पर प्रति ट्रिप 100 रुपये लिए जाने के ग्रामीणों के आरोपों की भी प्रशासनिक स्तर पर जांच की मांग उठ रही है। ग्रामीण चाहते हैं कि यदि कोई शुल्क लिया जा रहा है तो उसकी वैधता, रसीद और पंचायत के रिकॉर्ड की जांच की जाए।
16. अब देखना होगा—कब बदलेगी तस्वीर?
टांगोटोली के ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर 15 साल से चली आ रही सड़क की समस्या का समाधान कब होगा? क्या प्रशासन गांव की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करेगा? क्या पांच किलोमीटर सड़क का निर्माण होगा? क्या पंचायत स्तर पर बालू परिवहन से जुड़े कथित शुल्क की जांच होगी?
ग्रामीणों की मांग साफ
सड़क चाहिए, स्थायी सड़क चाहिए।
स्कूल जाने वाले बच्चों को कीचड़ से मुक्ति चाहिए।
बीमार और बुजुर्गों के लिए सुगम आवागमन चाहिए।
और यदि पंचायत स्तर पर कोई शुल्क लिया जा रहा है, तो उसका नियम, रसीद और पूरा हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए।
अब सवाल पंचायत से लेकर प्रशासन तक है—15 साल से कीचड़ में चल रहे टांगोटोली के ग्रामीणों को पक्की सड़क आखिर कब मिलेगी?

: बालू निकासी, ₹100 प्रति ट्रिप व बिना रसीद राशि लेने संबंधी आरोप ग्रामीणों के बताए अनुसार हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पंचायत/अधिकारियों का पक्ष लेना आवश्यक है।













