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16 अगस्त की सुबह तक फहराता रहा तिरंगा! निर्माणाधीन एकलव्य हॉस्टल में नियमों की धज्जियां उड़ाने का आरोप


16 अगस्त सबेरे 6.48 तक फहरता रहा

15 अगस्त की शाम नहीं उतारा गया राष्ट्रीय ध्वज, सुबह 6:38 बजे तक फहराता मिला — जिम्मेदार कौन? प्रशासन से कार्रवाई की मांग

RK GLOBAL NEWS राजकुमार विशेष रिपोर्ट फरसाबहार/जशपुर। देश ने 15 अगस्त को पूरे सम्मान और गौरव के साथ 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाया, लेकिन फरसाबहार क्षेत्र में निर्माणाधीन एकलव्य आवासीय हॉस्टल परिसर से राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और सरकारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है।

सामने आए वीडियो में 16 अगस्त 2026 की सुबह 6:38 बजे निर्माणाधीन परिसर में राष्ट्रीय ध्वज फहराता हुआ दिखाई दे रहा है। यानी 15 अगस्त के बाद भी अगले दिन सुबह तक तिरंगा वहां लगा हुआ था।

निर्माणाधीन एकलव्य आवासीय हॉस्टल का ठेकेदार होगा। जिम्मेदारी या कार्यकर्ता

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि यह सरकारी संस्था के अधीन निर्माणाधीन परिसर है और वहां स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आधिकारिक रूप से राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया था, तो 15 अगस्त की शाम निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार झंडा क्यों नहीं उतारा गया?

गृह मंत्रालय की आधिकारिक जानकारी के अनुसार सार्वजनिक भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज सूर्योदय से सूर्यास्त तक फहराने का प्रावधान है और उसे विधिवत उतारा जाना चाहिए।

ऐसे में 16 अगस्त की सुबह तक तिरंगा फहरता दिखाई देना लापरवाही और नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

वीडियो बना अहम सबूत

 

इस पूरे मामले में सामने आया वीडियो महत्वपूर्ण है। वीडियो में GPS Map Camera का टाइमस्टैम्प 16 अगस्त 2026, सुबह 6:38 बजे दिखाई देता है और उसी दौरान परिसर में राष्ट्रीय ध्वज फहराता हुआ नजर आता है।

अब सवाल यह है कि—

➡️ झंडा फहराने की अनुमति किसने दी?

➡️ झंडा उतारने की जिम्मेदारी किस अधिकारी/कर्मचारी की थी?

➡️ 15 अगस्त की शाम झंडा क्यों नहीं उतारा गया?

➡️ 16 अगस्त की सुबह तक झंडा फहराने का आदेश किसके द्वारा दिया गया था?

➡️ क्या संबंधित कर्मचारियों को Flag Code के नियमों की जानकारी नहीं थी?

➡️ यदि जानकारी थी तो नियमों का पालन क्यों नहीं किया गया?

क्या होगी कार्रवाई?

राष्ट्रीय ध्वज के प्रदर्शन और उपयोग को Flag Code of India, 2002 तथा Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 नियंत्रित करते हैं। गृह मंत्रालय ने राज्यों और सरकारी विभागों को इन प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं।

हालांकि, सिर्फ देर से झंडा उतारने को सीधे राष्ट्रीय ध्वज का आपराधिक अपमान कहना कानूनी रूप से सही नहीं होगा। Prevention of Insults to National Honour Act की धारा 2 में राष्ट्रीय ध्वज का जानबूझकर अपमान, अवमानना या उसे नीचा दिखाने जैसे कृत्यों पर तीन वर्ष तक की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।

इसलिए पूरे मामले में पहले प्रशासनिक जांच जरूरी है कि वास्तव में नियम का उल्लंघन हुआ या कोई विशेष अनुमति/परिस्थिति थी।

SDM और कलेक्टर से जांच की मांग

मामले को लेकर अब SDM फरसाबहार और कलेक्टर जशपुर से निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।

जांच में यह सामने आना चाहिए कि स्वतंत्रता दिवस पर निर्माणाधीन एकलव्य हॉस्टल में ध्वजारोहण किसके निर्देश पर हुआ, झंडा उतारने की जिम्मेदारी किसकी थी और 16 अगस्त की सुबह तक राष्ट्रीय ध्वज क्यों फहरता रहा।

यदि जांच में संबंधित अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए।

राष्ट्रध्वज सम्मान का प्रतीक है, लापरवाही का विषय नहीं

तिरंगा देश के सम्मान, स्वाभिमान और करोड़ों भारतीयों की भावनाओं का प्रतीक है। इसलिए सरकारी संस्थानों में राष्ट्रीय ध्वज से संबंधित नियमों का पालन महज औपचारिकता नहीं, बल्कि गंभीर जिम्मेदारी है।

अब देखना यह है कि वीडियो सामने आने के बाद फरसाबहार प्रशासन और जिला प्रशासन जशपुर इस मामले में संज्ञान लेकर जांच कराता है या मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।

RK GLOBAL NEWS की नजर इस पूरे मामले पर बनी रहेगी।

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Rajkumar