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समीत बेक अधीक्षक बालक छात्रवास फरसाबहार ने गुहार लगाई हाईकोर्ट बिलासपुर  प्रभार बदलने का आदेश


समीत बेक अधीक्षक बालक छात्रवास फरसाबहार ने गुहार लगाई हाईकोर्ट बिलासपुर  प्रभार बदलने का आदेश

RK GLOBAL NEWS राज कुमार विशेष रिपोर्ट बिलासपुर/जशपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर ने जशपुर जिले के फरसाबहार स्थित शासकीय आदिवासी छात्रावास से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में अंतरिम राहत देते हुए छात्रावास अधीक्षक का प्रभार बदलने संबंधी 13 जुलाई 2026 के आदेश के प्रभाव एवं क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। न्यायालय ने राज्य शासन सहित संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

यह मामला डब्ल्यूपीएस क्रमांक 5514/2026

यह मामला डब्ल्यूपीएस क्रमांक 5514/2026 के रूप में समीत बेक द्वारा दायर याचिका से संबंधित है। याचिकाकर्ता ने न्यायालय को बताया कि वे फरसाबहार स्थित शासकीय पोस्ट मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास में छात्रावास अधीक्षक के पद पर कार्यरत हैं तथा उन्हें प्री-मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया था।

13 जुलाई 2026 को जारी एक आदेश

याचिका के अनुसार, 13 जुलाई 2026 को जारी एक आदेश के माध्यम से प्री-मैट्रिक छात्रावास का प्रभार उनसे वापस लेकर शासकीय प्राथमिक शाला नेगीटोली में पदस्थ एक शिक्षक मनराज चौहान (एलबी) को सौंप दिया गया। याचिकाकर्ता ने इस आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि यह राज्य शासन द्वारा 24 फरवरी 2026 को जारी परिपत्र तथा इसी विषय में उच्च न्यायालय द्वारा पूर्व में दिए गए आदेश के विपरीत है।

न्यायालय के समक्ष तर्क रखा

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने न्यायालय के समक्ष तर्क रखा कि शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद एक शिक्षक को छात्रावास अधीक्षक का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है, जबकि याचिकाकर्ता पहले से उक्त दायित्व का निर्वहन कर रहे थे। इसलिए विवादित आदेश प्रथम दृष्टया शासन की नीति और पूर्व न्यायिक आदेशों से मेल नहीं खाता।

दो सप्ताह का मिला समय 

मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय ने राज्य शासन की ओर से उपस्थित उप महाधिवक्ता को नोटिस स्वीकार करने की अनुमति दी तथा प्रतिवादियों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय प्रदान किया। साथ ही निजी प्रतिवादी को भी विधिवत नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया।

 

अंतरिम राहत की मांग पर विचार करते हुए न्यायालय ने कहा कि मामले की परिस्थितियों को देखते हुए फिलहाल 13 जुलाई 2026 के विवादित आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगाई जाती है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल अंतरिम व्यवस्था के रूप में पारित किया जा रहा है।

अगली पेसी तिथि 18 अगस्त 2026

उच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त 2026 निर्धारित की है। अब इस तिथि पर राज्य शासन और अन्य प्रतिवादियों के जवाब तथा दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर आगे की सुनवाई होगी।

इस आदेश को जशपुर जिले के आदिवासी छात्रावासों के प्रशासनिक प्रभार से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल न्यायालय के अंतरिम आदेश के कारण 13 जुलाई 2026 का विवादित आदेश प्रभावी नहीं रहेगा। अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा सभी पक्षों की सुनवाई के बाद ही लिया जाएगा।

Rajkumar