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सिकिरमा के स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल: एक शिक्षक के भरोसे प्रार्थना, दूसरे स्कूल में शिक्षिका देर से पहुंचीं, आखिर जिम्मेदार कौन?


RK GLOBAL NEWS | विशेष समाचार राजकुमार की रिपोर्ट रिपोर्ट 

फरसाबहार (जशपुर)। विकासखंड फरसाबहार के पूर्व माध्यमिक शाला सिकिरमा एवं उससे लगे प्राथमिक शाला सिकिरमा की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं। प्राप्त जानकारी एवं मौके पर ली गई तस्वीरों के अनुसार, 13 जुलाई 2026 को सुबह लगभग 10:07 बजे पूर्व माध्यमिक शाला में केवल परमेश्वर साय, जो संकुल समन्वयक भी हैं, अकेले बच्चों की प्रार्थना कराते दिखाई दिए। वहीं आरोप है कि समीप स्थित प्राथमिक शाला की शिक्षिका सुमन्ति तिर्की लगभग 10:25 बजे विद्यालय पहुंचीं।

यदि यह स्थिति नियमित है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या विद्यालयों का संचालन नियमानुसार हो रहा है या शिक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है?

प्रमुख सवाल

क्या पूर्व माध्यमिक शाला सिकिरमा में सुबह 10:07 बजे केवल एक ही शिक्षक मौजूद थे?

अन्य शिक्षक उस समय कहां थे और उनकी उपस्थिति क्या दर्ज है?

क्या संकुल समन्वयक परमेश्वर साय को अकेले ही पूरे विद्यालय की जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है?

प्राथमिक शाला की शिक्षिका सुमन्ति तिर्की यदि 10:25 बजे पहुंचीं, तो निर्धारित समय पर विद्यालय क्यों नहीं पहुंचीं?

क्या दोनों विद्यालयों में शिक्षकों की ड्यूटी बारी-बारी से लगाई जा रही है?

क्या विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) फरसाबहार को वास्तविक स्थिति से अनभिज्ञ रखा जा रहा है?

क्या शिक्षकों की नियमित निगरानी और निरीक्षण केवल कागजों तक सीमित है?

बच्चों की पढ़ाई पर असर

विद्यालय शिक्षा का मंदिर माना जाता है। यदि शिक्षक समय पर उपस्थित नहीं होंगे तो सबसे अधिक नुकसान विद्यार्थियों की पढ़ाई का होगा। सुबह की प्रार्थना अनुशासन और समयपालन का प्रतीक होती है। जब शिक्षक स्वयं समय का पालन नहीं करेंगे तो बच्चों में क्या संदेश जाएगा?

प्रशासनिक निगरानी पर सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय-समय पर औचक निरीक्षण हो, तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार विद्यालयों में समयपालन को गंभीरता से नहीं लिया जाता।

 

जांच की मांग

ग्रामीणों ने मांग की है कि:

दोनों विद्यालयों के शिक्षकों की उपस्थिति पंजी की जांच की जाए।

संबंधित दिन का बायोमेट्रिक/हाजिरी रिकॉर्ड देखा जाए।

सीसीटीवी या अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया जाए।

यदि लापरवाही सिद्ध होती है तो संबंधित शिक्षकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

विकासखंड शिक्षा अधिकारी स्वयं मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करें।

फोटो क्या दर्शाती है?

उपलब्ध तस्वीर में विद्यालय परिसर में बड़ी संख्या में विद्यार्थी प्रार्थना के लिए खड़े दिखाई दे रहे हैं। तस्वीर से यह प्रतीत होता है कि एक शिक्षक बच्चों को व्यवस्थित करा रहे हैं। हालांकि, केवल इस फोटो के आधार पर यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि उस समय विद्यालय में अन्य शिक्षक मौजूद नहीं थे या अनुपस्थित थे। इस संबंध में प्रशासनिक जांच के बाद ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सकता है।

निष्कर्ष

यदि विद्यालय निर्धारित समय पर नहीं खुल रहे हैं या शिक्षक नियमित रूप से विलंब से पहुंच रहे हैं, तो यह गंभीर प्रशासनिक विषय है। वहीं यदि आरोप तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं, तो जांच से यह भी स्पष्ट होना चाहिए। शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है ताकि विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित न हो।

(नोट: इस समाचार में लगाए गए आरोप स्थानीय स्तर पर प्राप्त जानकारी और उपलब्ध दावों पर आधारित हैं। निष्पक्षता की दृष्टि से संबंधित शिक्षकों, संकुल समन्वयक परमेश्वर साय तथा विकासखंड शिक्षा अधिकारी फरसाबहार का पक्ष प्रकाशित किया जाना भी आवश्यक है। जांच के बाद ही किसी प्रकार की प्रशासनिक जिम्मेदारी या दोष तय किया जा सकता है।)

 

Rajkumar