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ग्राम पंचायत सिकिरमा का पंचायत भवन बना पोस्टरों का अड्डा! आखिर किसके आदेश से ढका गया पंचायत का नाम, उठे गंभीर सवाल


सिकिरमा, फरसाबहार (जशपुर)। युवराज साय की रिपोर्ट RK GLOBAL NEWS 

ग्राम पंचायत सिकिरमा का पंचायत भवन इन दिनों अपनी पहचान खोता हुआ दिखाई दे रहा है। पंचायत भवन, जो ग्रामीण प्रशासन और जनता के अधिकारों का प्रतीक माना जाता है, वह अब विभिन्न निजी प्रचार-प्रसार वाले पोस्टरों से ढका नजर आ रहा है। भवन के मुख्य भाग में पंचायत का नाम तक स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पंचायत भवन की पहचान निजी विज्ञापनों के पीछे छिप गई है।

मौके पर देखने से प्रतीत होता है कि पंचायत भवन की दीवारों पर CSC सेवा केंद्र, वाहन बीमा केंद्र तथा अन्य निजी सेवाओं के बड़े-बड़े बोर्ड लगाए गए हैं। इन बोर्डों के कारण “ग्राम पंचायत सिकिरमा” का नाम लगभग पूरी तरह ढक गया है। इससे ग्रामीणों में यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर किसकी अनुमति से सरकारी भवन का उपयोग निजी प्रचार के लिए किया जा रहा है।

यदि पंचायत भवन स्वयं अपनी व्यथा सुनाए तो शायद वह यही कहे—

मैं ग्राम पंचायत सिकिरमा हूँ। मेरी पहचान मेरे नाम से है। मुझे जनता के बीच मेरी असली पहचान के साथ रहने दो। मुझे पोस्टरों से मत ढको। आखिर कौन है जिसने मेरी पहचान छीन ली? मैं सरकारी भवन हूँ, किसी निजी संस्था का विज्ञापन बोर्ड नहीं।”

ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत भवन की गरिमा बनाए रखने की जिम्मेदारी सरपंच देंमनी बाई और सचिव नान साय की है। यदि पंचायत भवन पर निजी संस्थाओं के बोर्ड लगाए गए हैं तो यह जानना आवश्यक है कि क्या इसके लिए पंचायत का कोई प्रस्ताव पारित हुआ था? क्या संबंधित विभाग से अनुमति ली गई थी? यदि नहीं, तो यह सरकारी संपत्ति के उपयोग को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

विशेष रूप से CSC सेवा केंद्र और वाहन बीमा सेवा केंद्र के बड़े-बड़े विज्ञापन भवन की पहचान पर हावी दिखाई देते हैं। लोगों का कहना है कि सरकारी भवन पर इस प्रकार निजी प्रचार-प्रसार करना उचित नहीं है। पंचायत भवन जनता की संपत्ति है और इसकी गरिमा बनाए रखना पंचायत प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है।

स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच की जाए। यदि बिना अनुमति सरकारी भवन पर निजी संस्थाओं के बोर्ड लगाए गए हैं, तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही पंचायत भवन से ऐसे सभी निजी विज्ञापन हटाकर उसकी मूल पहचान को पुनः स्थापित किया जाए।

यह भी आवश्यक है कि जिला प्रशासन और जनपद पंचायत इस मामले का संज्ञान लें तथा यह स्पष्ट करें कि क्या सरकारी भवनों का इस प्रकार निजी प्रचार के लिए उपयोग किया जा सकता है। यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई होनी चाहिए।

(नोट: यह समाचार उपलब्ध फोटो और लगाए गए आरोपों के आधार पर तैयार किया गया है। निष्पक्ष पत्रकारिता के सिद्धांतों के अनुसार सरपंच, सचिव, CSC संचालक तथा संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष प्रकाशित किया जाना भी आवश्यक है। यदि उनका पक्ष प्राप्त होता है, तो उसे भी समान महत्व के साथ प्रकाशित किया जाना चाहिए।)

Rajkumar